Moral Stories in Hindi | राजा की तीन बातें 2023

इस लेख मैं आपको एक नैतिक कहानी Moral Stories in Hindi मिलेंगी | जिसमे एक राजा के तीन बेटे है | बड़े हो जाने पर उन तीनो को राजपाट चलने के लिए तीन सीखे देती है |

Moral Stories in Hindi

 

राजा की तीन बातें | Moral Stories in Hindi


बहुत समय पहले की बात है। किसी सुदूर देश में किसी प्रतापी राजा का राज्य था। उस राजा के तीन पुत्र थे, एक दिन राजा के मन में आया, कि उसके पुत्र अब बड़े हो चुके हैं। तो क्यो ना पुत्रों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाये। कि समय आने पर वो अपनी राज-काज को सम्भाल सकें।


इसी सोच विचार के साथ राजा ने सभी पुत्रों को एक दिन दरबार में बुलाया और अपने पुत्रों से बोला- “ पुत्रों , हमारे राज्य में नाशपाती का कोई भी वृक्ष नहीं है ,तो मैं चाहता हूँ। 

तुम सब चार-चार महीने के अंतराल पर इस वृक्ष की तलाश में जाओ, और पता लगाओ कि वो कैसा होता है ?” राजा की आज्ञा पा कर तीनो पुत्र बारी-बारी से नाशपति के पेड़ खोजने के लिए गए, और देखने के बाद वापस लौट आये।
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सभी पुत्रों के लौट आने पर राजा ने पुनः सभी को दरबार में बुलाया, और उन सबसे नाशपति के पेड़ के बारे में बताने को कहा। तो


पहला पुत्र बोला , “ पिताजी नाशपति के जिस पेड़ को मैंने देखा,वह पेड़ तो बिलकुल टेढ़ा – मेढ़ा , और सूखा हुआ था। इतने में दुसरे पुत्र ने पहले को बीच में ही रोकते हुए कहा .


“ नहीं -नहीं" वो तो बिलकुल हरा –भरा था , लेकिन शायद उसमे कुछ कमी थी, क्योंकि उसपर एक भी फल नहीं लगा हुआ था। अपने दोनों भाईयो की बात सुनने के बाद तीसरे पुत्र ने बोला , “ भैया , लगता है, आप भी कोई गलत पेड़ को देख आये हैं। 

क्योंकि मैंने सचमुच नाशपाती का पेड़ देखा हैं, और वो बहुत ही शानदार था, और फलों से लदा पड़ा था .”और तीनो पुत्र अपनी -अपनी बात को लेकर आपस में विवाद करने लगे। कि तभी राजा अपने सिंघासन से उठे और बोले , “ पुत्रों , तुम्हे आपस में बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है , 

दरअसल तुम तीनो ही वृक्ष का सही वर्णन कर रहे हो। मैंने जानबूझ कर तुम्हे अलग- अलग मौसम में वृक्ष को खोजने के लिए भेजा था। इसलिए तुम तीनो को वह नाशपति का पेड़ अलग अलग देखा जो उस मौसम के अनुसार था। मैं चाहता हूँ, कि इस अनुभव के आधार पर तुम तीन बातों को गाँठ बाँध लो |

Moral of The Story :-


पहली बात , किसी चीज के बारे में सही और पूर्ण जानकारी चाहिए। तो तुम्हे उसे लम्बे समय तक देखना-परखना चाहिए। फिर चाहे वो कोई विषय हो ,वस्तु हो या फिर कोई व्यक्ति ही क्यों न हो।

दूसरी बात , हर मौसम एक सा नहीं होता। जिस प्रकार वृक्ष मौसम के अनुसार सूखता, हरा-भरा या फलों से लदा रहता है। उसी प्रकार मनुषय के जीवन में भी उतार चढाव आते रहते हैं। अतः अगर तुम कभी भी बुरे दौर से गुजर रहे हो, तो अपनी हिम्मत और धैर्य बनाये रखो , समय अवश्य बदलता है।


और तीसरी बात , अपनी बात को ही सही मान कर, उस पर अड़े मत रहो, अपना दिमाग खोलो , और दूसरों के विचारों को भी जानो। यह संसार ज्ञान से भरा पड़ा है। और चाह कर भी तुम अकेले सारा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते। इसलिए दुबिधा की स्थिति में किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लेने में संकोच मत करो।

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