लालची राजा | lalchi Raja | Moral Stories in Hindi

भारतवर्ष और संपूर्ण विश्व मैं कहानी कहने और सुनने की परंपरा वर्षो से चली आ रही है। Moral Stories in Hindi कहानी सुनना बड़ा ही मनोरंजक लगा है। कहानियाँ कई प्रकार की होती है। लेकिन इस लेख मै आपको नैतिक कहानियाँ देखने को मिलेगा जो सभी उम्र के लोगो के लिए बहुत ही जरूरी है। नैतिक कहानियाँ छोटी छोटी होती है। लेकिन अपने अंदर बहुत बड़ी बात छुपा के रखती है। नैतिक कहानियों से बच्चो का नैतिक विकाश होती है। और समझदारी भी बड़ती है। आज के लेख मैं ऐसे ही नैतिक कहानी लालची राजा lalchi Raja की देखने को मिलेगी।




1.लालची राजा | lalchi Raja | Moral Stories in Hindi

बहुत समय पहले की बात है। किसी देश में मिदास नाम का एक राजा, राज करता था। राजा मिदास बड़ा ही लालची था। क्योंकि वह अपनी पुत्री को छोड़कर अगर कोई दूसरी वस्तु संसार में उसके लिए प्यारी थी। तो बस सोना, प्यारा था।

क्योंकि वह रात में सोते सोते भी सोना जमा करने का सपने देखा करते थे। एक दिन राजा मिदाश अपने खजाने में बैठ सोने की ईंट, और अशरफयों को गिन रहा था। अचानक वहां पर एक देवदूत प्रकट हो गया |

और उसने राजा से कहा- मिदास,, तुम बहुत धनी हो।

मिदास ने मुंह लटका कर उत्तर दिया- मैं धनी कहां हूं। मेरे पास तो यह बहुत थोड़ा सा सोना और अशरफिया ही है।


देवदूत ने बोला- तुम्हारे पास इतने सारे सोने चांदी और अशरफिया है। फिर भी तुम्हें संतुष्ट नहीं है। कितना सोना चाहिए तुम्हें |

राजा ने कहा- मैं तो चाहता हूं, कि मैं जिस भी वस्तु को हाथ से स्पर्श करूं। वह सोने की हो जाएगी। देवदूत ने हंसा और बोला- अच्छी बात है, मै तुम्हे वर्दान देता हूँ,कल सुबह से तुम जिस भी वस्तु को छूवोगे, वह सोने की ही हो जाएगी।

उस दिन और रात में राजा मिदास को नींद नहीं आई। क्योंकि देवदूत ने राजा को, जो आशीर्वाद दिया था। उसके लिए वह पूरी रात जागकर ही सुबह होने का इंतजार करने लगा। वह सुबह उठा और उसने एक कुर्सी पर हाथ रख दिया। राजा मिदास के छूते ही वह कुर्सी, सोने की बन गई। इसके बाद उसने एक मैज को छुआ, तो वह भी सोने की बन गई।

राजा मिदास देवदूत की यह आशीर्वाद पाकर बहुत ही खुश हुआ। और उछलने कूदने लगा। वह पागल हो गए वह दौड़ता हुआ। अपने बगीचे में गया। और पेड़ों को छूने लगा, फल, फूल, पत्ते, डाल, गमले, सब सोने की हो गई। सब चमकने लगा। मिदास के पास सोने के अपार भंडार हो गई । राजा मिदास दौड़ते,चलते, नाचते ,कूदते बहुत थक गया था।

उसको यह भी पता नहीं चला कि उसके कपड़े भी सोने के होकर बहुत भारी हो गए हैं। अब राजा को प्यास लगी और उसे भूख भी बहुत लग रही थी। बगीचे से लौटकर राजा महल में आते है।और एक कुर्शी मैं बैठ जाते है। जैसे ही राज मिदास कुर्सी पर बैठते है, कुर्सी सोने की बन जाती है।

अब राज को भूख लगी तो उन्होंने खाना मंगवाया। लेकिन जैसे ही मिदास ने भोजन को हाथ लगाया, वह भोजन सोने का बन गया। उसने पानी से भरे गिलास को पीने के लिए जैसे ही उठाया। तो छूते ही वह गिलास और पानी दोनों ही सोने का हो गया। मिदास के सामने सोने की रोटियां सोने के चावल सोने के पानी आदि रखे थे।

राजा मिदास को बहुत भूख लग रही थी। किंतु सोने के भोजन को चबाकर नहीं खा सकता था। क्योंकि भूख मिटाने के लिए अनाज का होना बहुत ही जरूरी होता हैं। यह सब देख कर राजा,मिदास रो पड़ा। उसके रोने की आवाज सुनकर उसकी बेटी राजा के पास आये। उसने पिता को रोते हुए देखकर पिता की गोद में चलकर उसके आंसू पोछने लगी।

मिदास ने पुत्री को अपनी छाती से लगा लिया। लेकिन यह क्या मिदास ने पुत्री को अपनी छाती से जैसे ही लगाया। तो उसकी पुत्री भी सोने की मूर्ति बन गई। और उसकी पुत्री इतनी भारी हो गई थी, कि उसे गोद में से नही उठा पा रहा था।

बेचारा राजा मिदास सिर पीट पीट कर रोने लगा। यह देखकर देवदूत को दया आ गई। वह फिर से प्रकट हुआ, उसको देखते ही मिदास उसके पैरों पर गिर पड़ा। और प्रथना करने लगा।

अपना वरदान वापस लौटा लिजिए। महाराज,, देवदूत ने पूछा- अब तुम्हें सोना नहीं चाहिए। तो राज ने कहा मैं समझ नही पाया था,अब मुझे सोना नही चाहिए।

तब देवदुत ने कहा- अब बताओ एक गिलास पानी मूल्यवान है, या सोना। कपड़ा रोटी मूल्यवान है, या सोना। मिदास ने हाथ जोड़कर कहा मुझे सोना नहीं चाहिए। मैं जान गया हूं, कि मनुष्य को सोना नहीं चाहिए।

सोने के बिना मनुष्य का काम हो सकता हैं। लेकिन एक गिलास पानी और एक टुकड़े रोटी के बिना मनुष्य का काम नहीं चल सकता हैं।

अब मै कभी भी सोने का लोभ नहीं करूंगा। देवदूत ने एक कटोरे में जल दिया, और कहा -इसे सब पर छिड़क दो मिदास ने जब वह जल अपनी मैज, कुर्सी ,भोजन, पानी और बगीचों में छुए गए पेड़ों पर छिड़क दिया। तो सब पदार्थ पहले जैसे ही हो गए। और राजा भी खुशी-खुशी अपना जीवन व्यतीत करने लगा।

कहानी की सीख | Moral Of The Story :-

इस कहानी से हमें सीख मिलती है। कि मनुष्य चाहे कितना भी अमीर और कितना भी गरीब हो। उसे कभी भी लालच नहीं करना चाहिए। अत्यधिक लालच करने से उसके पास जो भी चीज होती है। वह उसे गवा देता है। इसलिए हमे लालच नही करनी चाहिए।

2. कीमत का सही आकलन | Moral Stories in Hindi


एक शहर में बहुत ही ज्ञानी प्रतापी साधु महाराज आये हुए थे, बहुत से दीन दुखी, परेशान लोग उनके पास उनकी कृपा दृष्टि पाने के लिए आने लगे थे। 

ऐसा ही एक दिन, एक दीन दुखी, गरीब आदमी उनके पास आया और साधु महाराज से बोला- "महाराज मैं बहुत ही गरीब हूँ। मेरे ऊपर लोगो का कर्जा भी बहुत है। जिसके कारण मैं बहुत परेशान रहता हूँ। मुझ पर ऐसे कुछ उपकार करें, जिससे मैं अपनी कर्ज से छुटकारा प् सकूँ।

 " साधु महाराज ने उसकी दशा को देखकर उसको एक चमकीला नीले रंग का पत्थर दिया। और कहा- "बालक! यह कीमती पत्थर है, यह तुम्हारी पीड़ा को दुर कर देगा। 

जाओ इसकी जितनी कीमत लगवा सको, लगवा लो और अपनी पीड़ा को दुर कर लो। 

" वो आदमी वहां से खुशी-खुशी चला गया। और उसे बेचने के इरादे से अपने एक जान-पहचान वाले फल-विक्रेता के पास गया और उसे उस पत्थर को दिखाकर उसकी कीमत जाननी चाही। 

फल विक्रेता बोला- "मुझे लगता है ये नीला शीशा है, महात्मा ने तुम्हें ऐसे ही दे दिया है। हाँ! यह सुन्दर और चमकदार भी दिखता है, तुम मुझे दे दो, इसके बदलें मैं तुम्हें 1000 रुपए दे दूंगा।

" बस एक हजार, वह आदमी निराश होकर अपने एक अन्य जान-पहचान वाले के पास गया जो की बर्तनों का व्यापारी था। उसने उस व्यापारी को वही पत्थर दिखाया। और उसे बचने के लिए उसकी कीमत जाननी चाही।

बर्तनो का व्यापारी बोला- "यह पत्थर कोई विशेष रत्न है, मैं इसके तुम्हें 10,000 रुपए अभी के अभी दे दूंगा।

" अब वह आदमी सोचने लगा, कि इसकी कीमत और भी अधिक होगी। और यह सोच कर वो वहाँ से चला आया। उस आदमी ने अब इस पत्थर को ले जाकर अब एक सुनार को दिखाया।

सुनार ने उस पत्थर को ध्यान से देखा और बोला- "ये पत्थर तो काफी कीमती है, इसके मैं तुम्हें 1,00,000 रूपये तक दे सकता हुँ।

वो आदमी अब समझ गया था। कि यह पत्थर अमुल्य है, 

उसने सोचा कि, क्यों न मैं इसे हीरे के व्यापारी को दिखाऊं, यह सोचकर वो शहर के सबसे बड़े हीरे के व्यापारी के पास गया और उसे वही पत्थर दिखाया। 

उस हीरे के व्यापारी ने जब वो पत्थर देखा तो देखता रह गया, चौकने वाले भाव उसके चेहरे पर स्पष्ट नजर आ रहे थे। उसने उस पत्थर को अपने माथे से लगाया। और पुछा तुम यह कहाँ से लाये हो? 

यह तो अमुल्य है, यदि मैं अपनी पूरी सम्पति भी बेच दूँ। तो भी इसकी कीमत नहीं चुका सकता। अब वह व्यक्ति सच में उस पत्थर की कीमत को जान गया।

कहानी की सीख | Moral Of The Story :-

जैसे उस हीरे की कीमत का सही आकलन एक हीरे का व्यापारी ही कर पाया। ठीक उसी तरह आपका लक्ष्य भी एक अनमोल रत्न है। और उसकी कीमत यानी उसको प्राप्त करने का ज्ञान आपको उस रत्न का व्यापारी ही बता पाएगा।

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