Acchi Acchi Kahani | समझने के बाद निर्णय लें

Acchi Acchi Kahani आज आप देखने वाले है | एक ऐसे नैतिक कहानी को जो आपको बहुत ही पसंद आएगी | साथ ही कुछ भी निर्णय लेने और बोलने से पहले आपको एक बार उसके बारे मैं जानने के लिए प्रेरित करेंगी, की आपको बिना जाने, समझे निर्णय नहीं लेना चाहिए | आज कल के भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकतर देखा जाता है। एक छोटी सी बात पर बहुत बड़ी गलती कर बैठते, नकारात्मकता इस तरह बैठ जाता है। कि वह यह भूल जाता है कि किया सही है। और किया गलत है।सामने वाले की बात को इग्नोर कर अपनी बात समझाने लग जाता है। अरे एक बार शांत मन से सूनो तो सही | की सामने वाला जो बोल रहा है, वह सही नहीं है | इसका मतलब यह भी तो नहीं, कि वह गलत ही है। इस बात को समझने की कोशिश करते है। एक छोटी सी Acchi Acchi Kahani कहानी से।
Acchi Acchi Kahani


समझने के बाद निर्णय लें || Acchi Acchi Kahani

एक बार की बात है। एक राजा शिकार खेलते खेलते बहुत दूर निकल गया, वह बहुत थक भी गया था। आराम करने के लिए वह एक पेड़ के पास गया। वहां ठंडी छाव मैं बहुत आराम मिली। उस पेड़ के नीचे एक ऋषिमुणी का कुटिया था। कुटिया में मुनि जी नहीं थे। जो कहीं गया हुआ था।


इतने में किसी दूसरे राज्य के राजा शिकार खेलते- खेलते बहुत तक गया था। और आराम करने के लिए उस पेड़ के पास आ गया। बहुत बड़ा पेड़ था। वह पहले, राजा से कुछ दूरी पर आराम कर रहा था। वह काफी थका हुआ था। वह छाव में आते ही पेड़ देखकर बोला- यह बरगद का पेड़ कितना आरामदायक है।


यह बात पहले राजा ने सुन लिया और बोला- नहीं राजन,,, यह पेड़ बरगद का नहीं पीपल का है। इस बात को लेकर दोनों राजाओं में आपस में बहस हो गई। इतने में ऋषिमुनी अपनी कुटिया पर आ गए दोनों राजाओं को आपस में लड़ता देख कर! उनके बीच आए |और बोले- राजन् आप दोनों शांत हो जाओ, उसने दोनों को शान्त कर के यह जान लिया कि लड़ाई किस लिए हो रही है।


उसने दोनों राजाओं से बोले मैं इस पेड़ के नीचे कुटिया बनाकर कई बरसो से रह रहा हूं। में इस पेड़ के बारे में भलीभांति जानता हूं। आप दोनों अपनी जगह में सही है। यह सुनकर दोनों राजा बोले- कैसे? ऋषि ने बोला -आप दोनों अपने स्थान आपस में बदल लो।


राजाओं ने ऋषि की अज्ञानुसार स्थान बदल लिए, और पहले राजा से पूछे राजन आप बताए कि पेड़ किसका है। उसने ऊपर पेड़ को देखकर आश्चर्चकित हो कर बोला- ऋषिवर यह पेड़ तो बरगद का हैं। यही सवाल उसने दूसरे राजा से भी पूछा- उसने भी आश्चर्य से बोला पेड़ तो पीपल का है।


दोनों राजाओं ने गौर से देखा तो बरगद के पेड़ पर ही पीपल का पेड़ था। जो बहुत बड़ा था। अब दोनों राजा आपस में समझ चुके थे। और अपने आप को कोस रहे थे। और एक दूसरे से क्षमा मांगी दोनों राजाओं ने ऋषीमुनी को प्रणाम किया। और खुशी-खुशी अपने राज्य चले गए।

Moral Of The Story :-

इस कहानी से हम यह सीखते है। कि समस्या को जाने बिना निर्णय नहीं देना चाहिए। साथ ही दूसरों के बात को भी समझना चाहिए।

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