Majedar Kahani | सात चाचा एक भतीजा की

आज की इस लेख मैं आपलोग देखेंगे "सात चाचा एक भतीजा" की Majedar Kahani को, जिसमे सात चाचा मिलकर अपने भतीजा को कैसे परेशान कर रहे थे। और अंत में भतीजा उन सातों चाचाओ से कैसे मुक्ति पाई। तो चलो शुरू करते है, Majedar Kahani को |

Majedar Kahani

सात चाचा एक भतीजा की

Majedar Kahani | सात चाचा एक भतीजा की

बहुत समय पहले की बात है। किसी गांव में एक गरीब लेकिन बेहद समझदार लड़का रहा करता था। जिसका नाम था गंगू, वह अपनी मां के साथ, गांव के आखिरी छोर पर एक टूटी फूटी झोपड़ी में रहता था। गंगू के सात चाचा थे।और सभी चाचा बेहद अमीर थे।

लेकिन गंगू को बिल्कुल भी प्यार नहीं करते थे। जब गंगू छोटा था, तभी उसके पिताजी स्वर्गवास को हो गए थे। इसके बाद सातों चचाओ ने मिलकर गंगू और उसकी मां को घर से बाहर निकाल दिया। जिसके बाद गंगू की मां ने मेहनत मजदूरी करके गंगू को बड़ा किया।

अब गंगू बड़ा हो गया था, और जमींदार के खेतों में काम क्या करता था। जिससे उन दोनों का भरण पोषण हो जाता था। गंगू के सातों चाचा थे, तो बहुत अमीर, लेकिन वह बहुत मूर्ख थे। वह जब तब गंगू के घर आकर उस पर रौब गाठते, और तरह-तरह के बेवकूफियों से उसे परेशान करता था।

लाख चाहने पर भी गंगू उनसे अपना पीछा नहीं छुड़ा पाता था। एक दिन बैठे-बैठे गंगू के दिमाग में एक बात आई। उसने सोचा? क्यों ना चाचा के धान का फायदा उठाया जाए। अगर मूर्ख के घर में धन है, तो बुद्धिमान क्यों भूखा मरे।

यही सोच कर उसने मन ही मन एक योजना बनाई। और योजना के अनुसार अपने चचाओ के घर दावत का न्यौता भेजा। न्यौता की बात सुनकर सातों चचाओ का लालच में आना लाजमी था। क्योंकि वह बहुत लोभी थे, और न्योता देने वाले दिन जब सातो चाचा गंगू के घर आए तो गंगू घर में नहीं था।

चचाओ के पूछने -पर उसकी मां, ने घर के बाहर बंधे गधे की रसी खोलकर। कहां - जा बेटा,,,भैया को खेत पर से जल्दी बुला के ले आओ। चाचा तो यह बात सुनकर हैरान रह गई। क्या गधा वाकई में यह काम कर सकता है। चचाओ ने उस गदहे को जैसे ही उसने जाता हुआ देखा। लेकिन बात कुछ और ही थी। गंगू अगले मोड़ पर खड़क था।

गदहे को रोक कर उसके पीठ पर बैठकर घर वापस आ गए। चाचाओ ने जब गंगू को वापस लौटते देखा। तो उनका मुंह फटा का फटा रह गया। उन्होंने गंगू से कहा क्यों न 10 सोने की अशर्फियां में गधा उसको बेच दे, लेकिन गंगो कहां मानने वाला था।

उसने 100 असर्फीयो की मांग रखी। भला एक गदहे की एक सौ असर्फिया कौन देता। और आखिर में 50 में मामला तय हो गया। इसके बाद वे बिना दावत खाए घर की और निकल पड़े। घर आते ही बड़े चाचा ने गधे से कहा- जा बेटा,, खेतों से किसी नौकर को बुला लाओ। इसके बाद उन्होंने गधे को खोल दिया। गधा भागा तो भागता ही चला गया।

जब बहुत देर तक गधा लौट कर वापस नहीं आया। तो सभी चाचा ने उसे खोजने के लिए बाहर निकले। पर वह तो नौ दो ग्यारह हो गया था। यह देख कर उसके चाचा बहुत आग बबूला हो गए। इधर गंगू को समझ आ रहा था, कि चाचा अब लौटे, तब लौटे गदहे को खोज रहे होंगे।

उसने दूसरी योजना बनाई। उसने गुस्से से भरे चाचा को जब गुस्से मै आते देखा। तो वह झूठ मुठ का बेहोश हो गया। और इसके बाद उसकी मां छाती पीट-पीटकर रोने लगी। चाचा का गुस्सा, यह सब देख कर शांत हो गया। तभी गंगू की मां रसोई से एक लकड़ी लाई। और गंगू को सुंघाने लगी।

लकड़ी सुंघाते ही गंगू होश में आ गया। चाचा ने जब यह करामाती लकड़ी देखी। तो उनका मन फिर से ललचा गया। उसने गंगू से दोबारा सौदा किया। और मामला फिर 50 असर्फियों में तय हो गया। चाचा तो अब यही सोच रहे थे। कि वह लोग दूर-दूर तक मशहूर हो जाएंगे।

क्योंकि उनकी करामाती लकड़ी सबके रोग दूर कर देगी। लेकिन दुख की बात यह थी, कि लकड़ी खरीदते हुए उन्हें एक हफ्ता हो गया था। और उनके घर में क्या, आस-पड़ोस में भी कोई बीमार नहीं पड़ रहा था। जब कुछ दिन और बिता तो चाचा को रहा नही गया। उन्होंने अपने घर के एक नौकर को पीट-पीटकर बेहोश कर दिया। तो चाचा ने उस लकड़ी को लाया। और अपने नौकर को सुघाने लगा।

लेकिन नौकर को कहां से होश आता। गंगू की लकड़ी तो एक साधारण लकड़ी थी। लकड़ी की कोई करामात ना देखकर बड़े चाचा फिर गुस्से से आग बबूला हो गए। और गुस्से से भरे फिर गंगू के पास पहुंचे। और उसकी खूब पिटाई की। फिर उसे बोरे में बंद करके नदी में डालने के लिए चल पड़े। थोड़ी दूर जाने के बाद चाचा को बहुत भूख लगी।

सड़क के किनारे एक पेड़ के नीचे उस बोरे को रख दिया। और खाने की तलाश में चल गए। उनके वहां से जाने के बाद संजोग बस बड़े चाचा का मुंह लगा, नौकर हरिया वहां से गुजर रहा था।उसने गंगू को कभी देखा तो नहीं था। लेकिन गंगू को परेशान करने की सारी तरकीबें, वही चाचा को सुझाया करता था।

क्योंकि बोरे में छोटा सा एक छेद था। इसी से गंगू बाहर का नजारा देख रहा था। उसे एक तरकीब सूझ गई उसने आवाज बदल कर कहा- बेटा, मैं नदी का प्रेत बोल रहा हूं, अगर खूब सारा धन कमाना चाहता है। तो मेरे पास आओ। हरिया पहले तो चौक गया।लेकिन पैसों के नाम पर, लालच में आ गया ।

गंगू फिर बोला- बेटा, इसके लिए तुम आंखें बंद कर लो, और फिर पेड़ के पास पड़े हुए बोरे की गाँठ खोलो और उसमें बैठ जाओ। पाँच मिनट बाद तुम नदी की सतह में पहुंच जाओगे। और वहां रखा बहुत सारा धन तुम्हारा हो जाएगा।

हरिया बिल्कुल वैसा ही किया गंगू तो अपने घर वापस आ गया। और बड़े चाचा ने बोरे को नदी में फेंक दिया। हरिया इस दौरान ना तो चिल्लाया, ना ही कुछ बोला, उसे तो पैसे चाहिए थे। कुछ दिनों बाद चाचाओ ने सोचा- क्यों ना गंगू की मां की हालत देख कर आया जाए।

सभी चाचा गंगू के घर पहुंचे, तो यह देखकर सबकी आँखे खुली की खुली रह गई। गंगू, तो मजे से बैठा हुआ था। चाचा को हैरान देकर उसने कहा- बड़े चाचा आपने जब मुझे बोरी में बंद करके नदी में फेंका, तो नदी के प्रेत ने मुझे थाम लिया, फिर ढेर सारा धन देकर मुझे विदा कर दिया। यह सुनकर चाचा के मुंह में पानी आ गया। उन्होंने गंभू को फिर खुशामद करनी शुरू कर दी।

कि वह उन सातों को अलग-अलग सात बोरों में बंद करके नदी में डाल दें। बस फिर क्या था, गंभू ने चाचाओ को बोरे में बंद किया। और नदी में डाल दिया। और इस तरह से सभी दुष्ट चाचाओ का अंत हो गया। और गंगू बेफिक्र होकर रहने लगा।

Conculasion :-

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