Moral Stories in Hindi | विद्या का सदुपयोग | नैतिक कहानी

नमस्कार ,,, दोस्तों आज के इस लेख हम आपको बताने जा रहे है | Moral Stories in Hindi "विद्या का सदुपयोग" के बारे मैं जो एक नैतिक कहानी है,,, इसमें एक वय्पारी अपने गुरु को दिया हुआ वचन को नहीं मानता है, जिससे उसको परेशानी होती है | और अंत मैं गुरु के पास जाता है,और अपने किये के पछतावे का अफ़सोस करता है | तो चलो आज की कहानी की शुरुआत करते है |
Moral Stories in Hindi
Moral Stories in Hindi "विद्या का सदुपयोग"


विद्या का सदुपयोग। Moral Stories in Hindi

एक व्यापारी था। वह पशु पक्षियों की व्यापारी क्या करता था। उसका एक गुरु भी था।जिसने उसको व्यापारी करना सिखाया था। व्यापारी, पशु पक्षियों की व्यापार करना सिखा था। परंतु उस व्यापारी, को यह पता नहीं था। कि उसके गुरु को पशु पक्षियों की भाषा की समझ है। और वह पशु पक्षियों द्वारा बोली जाने वाली भाषा को अच्छी तरह से समझ सकते हैं।

यह सोचकर एक दिन उस व्यापारी, के मन में ख्याल आता है की कितना अच्छा होता? अगर पशु पक्षियों की भाषा समझने की विद्या उसको भी मिली रहती। यह सोचकर वह वयपारी, एक दिन प्रात काल अपने गुरु के पास पहुंच गया। और उसकी खूब सेवा सत्कार की,

अपने शिष्य की यह सेवा सत्कार देखकर गुरु बहुत प्रसन्न हुआ। वह खुशी से बोल उठा बोलो तुम्हें क्या चाहिए? यह सुनकर उसके शिष्य व्यापारी, ने अपने गुरु से बोला- गुरु जी, मुझे पशु पक्षियों की भाषा समझने की विद्या सिखा दीजिए। गुरुजी ने अपने शिष्य की बात मान लिया।

और उसे पशु पक्षियों की भाषा समझने की विद्या सिखा दी। और अंत में गुरु ने शिष्य को यह चेतावनी देकर समझाया कि इस विद्या का उपयोग अपने लोभ तथा दूसरी जीवो को कष्ट देने के लिए करना नहीं। नहीं, तो इसका परिणाम बहुत ही भयंकर होगा।

इस बात पर शिष्य ने भी हां कह दिया। और खुशी-खुशी वापस घर आ गया। जब वह घर आया तो उसने देखा कि उसके दो कबूतर आपस में बातें कर रहा है? कि उसके मालिक का घोड़ा दो दिन के बाद मरने वाला है। यह सुनकर उस व्यापारी ने अपने घोड़े को ऊंचे दाम में अगले दिन बेच दिया।

फिर दूसरे दिन उसके घर के कुत्ते आपस में बातचीत कर रहे थे, कि मालिक की मुर्गियां जल्द ही मर जाएगी। यह सुनते ही वह व्यापारी अपनी सारी मुर्गियों को बाजार में जाकर बेच दिया।

घोड़ा और मुर्गियों को बेचकर व्यापारी बहुत खुश हो रहा था। कि उसे नुकसान नहीं हुआ। किंतु कुछ दिनों बाद वह वयपारी अपनी बिल्लियों को यह कहते हुए सुना, कि उसका मालिक अब कुछ दिनों का मेहमान है। और जल्द ही वह परलोक जाएंगे।


यह सुनकर व्यापारी को बहुत दुख हुआ और आश्चर्य भी हुआ! उसने तुरंत अपने गुरु के यहां जाने का प्लान बनाया, और चल गया उसने अपने गुरु को बिल्ली द्वारा कही गई बातों, को बता दिया।

यह सुनकर गुरु ने कहा- कि मैंने तुम्हें पहले ही बताया था। कि तुम इस विद्या का उपयोग कभी भी अपने लाभ और दूसरों को कष्ट पहुंचाने के लिए मत करना। 

यह बात उस व्यापारी को समझ में आ गई। वयपारी समझ गया था, कि उसे घोड़े और मुर्गियों को नहीं बेचना चाहिए था। इससे उन दोनों जीवों को कष्ट पहुंची थी।

फिर उसने मन मैं ठान लिया, कि वह आगे से किसी भी विद्या का दुरुपयोग नहीं करेगा। और अपने लाभ के लिए किसी दूसरे जीव जंतुओं को कष्ट नहीं पहुंचाएगा।

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Moral Of The Stories:-

विद्या का कभी भी दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। इतना समझने के बाद वह खुशी-खुशी घर को रवाना हो गए।

Conculasion :-

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