Short Moral Stories in Hindi | लोमड़ी और मोती हाथी की कहानी

हेलो,,, दोस्तों आज के इस लेख मैं आप पड़ने वाले है  | Short Moral Stories in Hindi लोमड़ी और मोती हाथी के कहानी के बारे मैं जिसमे मोती हाथी राजा बनने की लालच मैं अपनी जान से हाथ धो बैठा साथ ही लोमड़ी भी दुसरो को बुरा करने की चक्कर मैं अपनी जान से हाथ धो बैठे। तो चलो आज की कहानी की शुरुआत करते है।

Short Moral Stories in Hindi
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Short Moral Stories in Hindi | लोमड़ी और मोती हाथी

चंदनपुर के सामने एक वन था ,जिसका नाम था "चंदनवन" यह बहुत ही बड़ी और विशालकाय जंगल था | उस जंगल मैं कई तरह के जानवर रहते थे | चंदनवन के इस जंगल मैं एक हाथियों का परिवार भी रहता था | इसमें एक बड़े और बुजुर्ग हाथी था, जो परिवार का मुखिया था | 

उसका नाम "मोती" था वह सभी से बुजुर्ग होने के कारन उसका शरीर बहुत ही भरी भरकम और बड़ा था | एक दिन हाथी अपने समूहों से अलग थोड़ी दूर पर खाना खाने के लिए गया हुआ था | 

तभी उस जंगल मैं एक लोमड़ी अपने शिकार की तलाश मैं आयी, तो उसने मोती हाथी को देखकर लोमड़ी के मुँह मैं पानी आ गया। लोमड़ी , हाथी को अपना शिकार बनाने के बारे में सोचने लगा। और मन ही मन लोमड़ी शिकार करने की योजना बनाने लगा। 

लोमड़ी , सोचने लगा कि यह हाथी बहुत बड़ा है, अगर मैं इसका शिकार कर लूँ, तब मुझे कई दिनों तक भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। ऐसा सोचकर लोमड़ी, हाथी के पास गया

और उससे बोला - हाथी दादा, हमारे जंगल में कोई राजा नहीं है, हमारे जंगल के सभी जानवर चाहते हैं, कि कोई बड़ा और समझदार जानवर हमारे जंगल का राजा बने”

आप बड़े और समझदार दोनों है। क्या आप हमारे जंगल का राजा बनना पसंद करोगे? 

लोमड़ी की बात सुनकर "हाथी" खुश हो गया। उसने राजा बनने के लिए हाँ बोल दिया। इस पर सियार ने हाथी को अपने साथ चलने के लिए बोला। 
हाथी राजा बनने की ख़ुशी में झूमते हुए सियार के साथ जाने के लिए तैयार हो गया। सियार हाथी को ऐसे तालाब में ले गया, जिस तालाब में दलदल था। हाथी राजा बनने की ख़ुशी में इतना मस्त था, कि वह बिना सोचे तालाब में नहाने उतर गया। जैसे ही हाथी दलदल वाले तालाब में उतरा, हाथी के पैर दलदल में धंसने लगे। 

उसने सियार से बोला-तुम मुझे कैसे तालाब में ले आये, मेरी मदद करो, मेरे पैर दलदल में धंस गए हैं। हाथी की बात सुनकर लोमड़ी जोर-जोर से हंसने लगा। 

और हाथी से बोला-मैं तुम्हारा शिकार करना चाहता था, इसलिए मैंने तुमसे राजा बनने की बात का झूठ बोली। अब तुम दलदल में फंसकर मर जाओगे और मैं तुमको अपना भोजन बनाऊंगा”|

लोमड़ी की बात सुनकर हाथी की आँखों से आंसू आने लगे। उसने बाहर निकलने की बहुत कोशिश की, बहुत बार लोमड़ी से बाहर निकालने की विनती की,

 लेकिन लोमड़ी ने उसकी कोई मदद नहीं की और हाथी कुछ देर के प्रयत्न के बाद मर गया। 

हाथी के मरने के बाद लोमड़ी हाथी को खाने के लालच में उसकी पीठ पर चढ़ गया। हाथी को खाने के लालच में लोमड़ी यह भूल गया कि वह भी हाथी के साथ दलदल में नीचे धंसा जा रहा है। और अंत में, सियार भी हाथी के साथ धीरे-धीरे दलदल में धंसकर मर गया। 

Moral Of The Stories :-

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है, कि जो दूसरों के लिए बुरा करता है, उसके साथ भी बुरा होता है। इसलिए हमें जीवन में कभी भी किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए, अगर हम किसी के लिए बुरा करते हैं, तब हमें भी अपने साथ ऐसा होने के लिए तैयार रहना चाहिए। क्यूंकि बुरे कर्म का फल हमेशा बुरा होता है, इसलिए किसी के साथ कभी बुरा ना करें। आपको हमारी ये कहानी कैसी लगी। और आपने इससे क्या सीखा, हमें कमेंट करके जरूर बतायें। ऐसे ही मजेदार कहानी के लिए हमारे वेबसाइट Hindistories.World पर जरूर आए।

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