Best Moral Stories in Hindi | संतोष का फल

आज की कहानी Best Moral Stories in Hindi कहानी है। यह मन की संतुस्टि से परिपूर्ण छोटी सी बच्ची की कहानी है। इस कहानी के माध्यम से आप जानेंगे। की इंसानो को संतुष्टि रखना बहुत जरुरी है। अगर आप संतुस्टि रखते है, तो आपसे सफल इंसान कोई भी नहीं है। कियोंकि भगवन हमें हमारे संतुष्टि की परीक्षा लेती है। इसमें अगर आप पास हो जाते है, तो आपको इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। ऐसे ही एक छोटी बच्ची की कहानी है, हमारे पास "संतोष का फल" जिसको हम एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझने की कोशिश करेंगे।
 
Best Moral Stories in Hindi
Best Moral Stories in Hindi | संतोष का फल 

Best Moral Stories in Hindi । छोटी बच्ची की संतुष्टि

बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक देश में बहुत अकाल पड़ा। उस देश के बहुत सारे लोग भूखे प्यासे मरने लगे। उसी नगर मैं एक धनी और दयालु व्यक्ति रहते थे। उन्होंने उस देश की आकाल के कारण बहुत सारे भूखे लोगों को मरते हुए देखा है।

इसलिए उसे इस अकाल को देखकर दया आ गई। उन्होंने सब छोटे बच्चों को प्रतिदिन एक रोटी देने के लिए पूरे नगर में घोषणा कर दी। दूसरे दिन सवेरे बगीचे में सब बच्चे इकट्ठे हुए और उन्हें रोटियां बांटने लगी।

रोटियां छोटी बड़ी थी, सब बच्चे एक दूसरे को धक्का देकर बड़ी रोटी पानी का प्रयास कर रहे थे। केवल एक छोटी लड़की जो बिल्कुल चुपचाप खड़ी थी। 

वह सबसे अंत में आगे बढ़ी और टोकरी में सबसे छोटी, अंतिम रोटी बची थी, उसने उसे बड़ी प्रसन्नता के साथ ले लिया। 

और घर वापस चली आई। दूसरे दिन फिर रोटियां बांटी गई उस लड़की को आज भी सबसे छोटी रोटी मिली। 

लड़की ने जब घर लौटकर रोटी तोड़ी तो, रोटी में से सोने की एक मूहर निकली। उसकी माता ने कहा कि उस मूहर को वापस उस धनी व्यक्ति को देकर आ जाओ। 

लड़की दौड़ी दौड़ी उस धनी व्यक्ति के घर गई। धनी व्यक्ति ने उसे देखकर पूछा तुम क्यों आई हो। लड़की ने कहा कि अपने जो रोटी दिए थे। 

उस रोटी में से यह सोने की मोहर निकली है। 

शायद आंटे में गिर गई होगी, रोटी बनाते समय । इसलिए मैं आपको यह सोने की मोहर वापस देने आई हूं। 

धनी व्यक्ति बहुत खुश हुआ। उसने उस लड़की को अपने धर्मपुत्री बना लिया और उसकी माता के लिए मासिक वेतन निश्चित कर दिया। 

वह लड़की बड़ी होने पर उसे धनी व्यक्ति की उत्तराधिकारी बना दिया।

कहानी की सीख

इस कहानी से हमें यह सीख सीखने को मिलती है, कि व्यक्ति को हर छोटी बड़ी चीज पर संतोष बना के रखना चाहिए। क्योंकि कुदरत हमें हमारी संतुष्टि का परीक्षा लेती है। और उसका परिणाम बहुत ही अच्छी होती है।

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