Hindi Kahaniyaan Acchi Acchi | भगवान बुद्ध की सीख 2023

हेलो,,, बच्चो आज मैं आपलोगो के लिए लेकर आया हूँ, Hindi Kahaniyaan Acchi Acchi "बुद्ध की कहानी" एक बहुत ही प्रेरणात्मक और मजेदार कहानी। जिसको पड़ने के बाद आप सभी रोमांचित हो जायेंगे। साथ ही आपलोगो को एक नई सीख़ भी मिलेंगी। इस कहानी को पड़ने के बाद आप कभी भी अपनी लक्ष्य से नहीं भटकेंगे, न ही विफल होंगे। यह कहानी आपको सिखाएगी की किसी भी क्षेत्र मैं सफलता कैसे प्राप्त किया जा सकता है। तो चलो आज की कहानी की शुरुआत करते हैं।

Hindi Kahaniyaan Acchi Acchi
भगवान बुद्ध  की सीख

भगवान बुद्ध  की सीख | Hindi Kahaniyaan Acchi Acchi

एक बार की बात है, गौतम बुद्धा अपने कुछ शिष्यों को साथ लेकर प्रवचन देने के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य की तरफ जा रहे थे। सफर बहुत लंबा था तो वो अपने साथ पहले ही खाने पीने की सभी चीजें लेकर चले।

सफर के दौरान उनके एक गांव मिला जो की पूरी तरह से खाली था। चारों तरफ सिर्फ झोपड़ियां और सूखे खेत ही थे। उसे देखकर ऐसा मालूम पड़ता की वहां के सभी लोग पानी की कमी के चलते अपना सब कुछ छोड़कर वहां से कहीं और चले गए हैं। 

उस गांव में एक छोटा सा कुवाँ भी खुदा था। बुद्ध के शिष्यों ने जब उस कुवें में झांका तो वो भी खाली था। उस कुवें में सिवाय धूल के और कुछ नही था। अंधेरा भी होने का था, तो गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को एक रात वहीं गुजारने को कहा। 

अगले दिन सुबह वो सभी गांव से निकलने लगे। वो लोग जैसे ही गांव से थोड़ा बाहर निकले, तो उन्होंने देखा की एक जगह पर बहुत सारे छोटे बड़े गड्डे खुदे हुवे थे। वो थोड़ा और आगे बड़े तो उन्होंने देखा की वहां हर थोड़ा दूरी पर वैसे ही सैकड़ों छोटे छोटे गड्ढे खुदे हुवे थे। 

गौतम बुद्ध भी ये सब देख रहे थे, लेकिन वो इस बारे में कुछ बोले नही। उनके शिष्यों के मन में ये सवाल आने लगा की आंखिर यहां इतने सारे गड्ढे क्यों बनाए हुवे हैं? ऐसा करने की क्या वजह हो सकती है?

अपने मन को शांत करने के लिए एक शिष्य ने अंततः गौतम बुद्ध से वहां बने गड्ढों के बारे में पूछ ही लिया। 

गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को बताया, इस गांव की परिस्थिति देखकर पता चलता है. की इस गांव में कुछ समय पहले पानी सूख गया होगा। और पानी की तलाश में ही यहां इतने सारे गड्ढे खोदे गए हैं। 

जिन लोगों ने ये गड्डे खोदे उन्होंने मेहनत तो बहुत करी, लेकिन किसी ने भी धैर्य नहीं दिखाया। अगर उन लोगों ने धैर्य के साथ सिर्फ एक या दो जगह पर गहराई तक खोदा होता, तो उन लोगों को पानी मिल जाता। 

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लेकिन वो लोग थोड़ा थोड़ा खोदते रहे, और जब पानी नहीं निकला तो दूसरी जगह खोदने लग गए। इस तरह उन्हें कहीं पर भी पानी नहीं मिला, और उन्हें इस जगह को छोड़ कर जाना पड़ा। 

इस बात को आगे बढ़ाते हुवे गौतम बुद्ध ने अपने शिष्यों को समझाया की, “किसी भी काम में सफल होने के लिए हमे सिर्फ मेहनत ही नहीं करनी होती। बल्कि कई बार धैर्य रखकर उस काम को करते रहना होता है। 

जब मेहनत से सफलता नहीं मिलती तो धैर्य काम आता है। जिस व्यक्ति के अंदर धैर्य होता है, वो सफलता भी पाता है।

कहानी की सीख | Moral Of The Story :-

असफल होने पर, अपने काम को बार बार बदलते रहना हमे सफलता से और दूर कर देता है। इसलिए किसी काम में अगर आप बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन सफल नहीं हो पाते हैं। तो थोड़ा धैर्य रखें, अगर आपका काम और लक्ष्य सही होगा, तो सफलता जरूर मिलेगी।

लक्ष्य का निर्धारण | Hindi Kahaniyaan Acchi Acchi

एक बार की बात है, एक निःसंतान राजा था। समय के साथ वह बुढ़ा हो चुका था, और उसे राज्य के लिए एक योग्य उत्तराधिकारी न होने की चिंता सताने लगी थी। योग्य उत्तराधिकारी की खोज के लिए राजा ने पुरे राज्य में ढिंढोरा पिटवाया, कि अमुक दिन शाम को जो मुझसे मिलने आएगा, उसे मैं अपने राज्य का एक हिस्सा दूंगा। 

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लक्ष्य का निर्धारण | Hindi Kahaniyaan Acchi Acchi


राजा के इस निर्णय से राज्य के प्रधानमंत्री ने रोष जताते हुए राजा से कहा, "महाराज, आपसे मिलने तो बहुत-से लोग आएंगे। और यदि सभी को उनका भाग देंगे, तो राज्य के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे। ऐसा अव्यावहारिक काम न करें।"

राजा ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त करते हुए कहा, ''प्रधानमंत्री जी!, आप चिंता न करें, देखते रहें, क्या होता है।" निश्चित दिन जब सबको राजा से मिलना था। तो राजा ने राजमहल के बगीचे में एक विशाल मेले का आयोजन किया। 

मेले में नाच-गाने और शराब की महफिल जमी थी। खाने के लिए अनेक प्रकार की स्वादिष्ट पदार्थ थे। मेले में कई खेल भी हो रहे थे। जिसके कारण राजा से मिलने आने वाले कितने ही लोग नाच-गाने में अटक गए, कितने ही सुरा-सुंदरी में, कितने ही आश्चर्यजनक खेलों में मशगूल हो गए। तथा कितने ही खाने-पीने, घूमने-फिरने के आनंद में डूब गए। 

दिन के समय बीतने लगा, और शाम ढलने की समय आने लगा। लेकिन कोई भी वय्क्ति राजा के दरबार तक नहीं पहुंचा। क्योंकि बहुत से लोग उस मेले में मशगूल हो गए थे। पर इन सभी के बीच एक व्यक्ति ऐसा भी था, जिसने मेले के किसी चीज की तरफ देखा भी नहीं ।

क्योंकि उसके मन में निश्चित ध्येय था, कि उसे राजा से ही मिलना है। इसलिए वह बगीचा पार करके सीधे राजमहल के दरवाजे पर पहुंच गया। पर वहां खुली तलवार लेकर दो चौकीदार खड़े थे। 

उन्होंने उसे रोका। पर वह रुकने वाला कहाँ था, उनके रोकने को अनदेखा करके और चौकीदारों को धक्का मारकर वह दौड़कर राजमहल में चला गया, क्योंकि वह निश्चित समय पर राजा से मिलना चाहता था। 

अब जैसे ही वह अंदर पहुंचा, राजा उसे सामने ही मिल गए और राजा ने कहा- "मेरे राज्य में कोई व्यक्ति तो ऐसा मिला जो किसी प्रलोभन में फंसे बिना अपने ध्येय तक पहुंच सका। 

तुम्हें मैं आधा नहीं पूरा राजपाट दूंगा। तुम ही मेरे उत्तराधिकारी बनोगे।" वह व्यक्ति खुश हुआ, कि वह जिस लक्ष्य से आया था। उसका फल मिल गया। वह बिना किसी रुकावट के चक्कर में आये अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहा।

कहानी की सीख | Moral Of The Story :-

उस व्यक्ति का दृढ़ संकल्प ही उसे उसके लक्ष्य पर स्थिरता बनाई रखी। यह शब्द 'दृढ़ संकल्प' की गहराई को समझने वाला व्यक्ति अपनी मनचाही लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। और प्राप्त भी कर लेता है ठीक उस व्यक्ति की तरह।
सीख जो हमे इस Buddha Motivational Story से मिलती है
इस कहानी को पढ़कर आप ये बात तो जान ही गए होंगे, की सफल होने के लिए हमारे अंदर धैर्य (patience) होना कितना जरूरी है। जिस तरह बगुला मछली की तलाश में धैर्य के साथ खड़ा रहता है, उसी तरह हमे भी मेहनत और धैर्य के साथ अपने काम करते रहना बहुत जरूरी है।

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