Moral Stories Hindi | काबिलियत की पहचान

आज की कहानी बहुत ही प्रेरणा देने वाली कहानी है यह कहानी ऐसे लोगों के लिए है l जो अपने आप को तुच्छ, बेकार और फालतू समझता है। वास्तव में ऐसे लोग अपने काबिलियत को पहचान ही नहीं पाते हैं। आज की कहानी Moral Stories Hindi "काबिलियत की पहचान" इसी पर आधारित है। इसको हम एक छोटी सी कहानी के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं।

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Moral Stories Hindi | काबिलियत की पहचान

बहुत समय पहले की बात है। किसी घने जंगल में एक बहुत बड़े तालाब थे। उस तालाब के किनारे बहुत ही हरी-भरी हरियाली छाई हुई थी। और एक बहुत बड़ा बगीचा था।

उस बगीचे में तरह-तरह के फल फूल के पौधे लगे हुए थे। लोग वहां पर उस बगीचे में आनंद लेने और प्राकृतिक खुबसूरती देखने के लिए बराबर आते रहते थे। वहां पर लगे तरह-तरह के फूल पौधों की तारीफ करते थे। कि इतनी हरियाली है, कितने सुंदर-सुंदर फल फूल पौधे हैं। सभी लोग हरी-भरी पेड़ पौधों की तारीफ करते थे। 

इस बगीचे में एक गुलाब का पौधा भी था। उस पौधे में कई सारे गुलाब के फूल लगे हुए थे।जो देखने में बहुत ही सुंदर और सुगंधित थे। लोग उस गुलाब के फूल को देखकर कहते, वह कितने प्यारे फूल हैं। और खूब तारीफ करते थे। जबकि गुलाब के पौधे में लगे पत्ते की कोई भी तारीफ नहीं करते थे। 

यह सब देखकर गुलाब का पत्ता काफी उदास हो गया,और वह मायुश रहने लगा। उसके मन में तरह-तरह के विचार आने लगे। की गुलाब के इसी पौधे में लगे फूल को तो हर कोई बहुत तारीफ कर रहा है। लेकिन गुलाब के पौधे में, मैं भी हूं, लेकिन मेरी तारीफ कोई भी नहीं कर रहा है।

गुलाब के पौधे की पत्ता सोचता था, कि शायद मेरी जिंदगी बेकार है, मैं किसी काम का नहीं। इसीलिए कोई भी मेरी तारीफ नहीं करता है। और वह पत्ता ऐसे ही उदासी भरी जिंदगी बिताने लगी।कुछ महीनो बाद उस जंगल में जोर-जोर से हवा चलने लगी। और देखते ही देखते हवाएं तेज तूफान और आंधी का रूप ले लिया। 

सारे गुलाब के पौधे, जितने भी गुलाब के फूल थे। वह सारे फूल गिरकर इधर-उधर बिखर गए थे। सारे हरियाली तहस-नहस हो गई। इतने में गुलाब का वह पत्ता भी तेज हवा की कारण पौधे से अलग होकर दूर उस बड़े तालाब में जाकर गिरा। 

पत्ते ने देखा तेज हवा के कारण एक चींटी इस तालाब में जाकर गिरी। वह चींटी अपनी जान बचाने के लिए काफी प्रयास करते रहे । लेकिन उसके सारे प्रयास असफल रहे, और वह काफी थक चुकी थी। और अब उसे लग रही थी, कि उसकी मृत्यु अब नजदीक आ चुका है। और उसका बचना नामुमकिन है। 

तभी उस पत्ते ने कहा घबराओ नहीं। इधर आओ, मैं तुम्हारी मदद करता हूं, ऐसा कहते हुए उस पत्त्ते ने पानी में गिरे चींटी को अपने ऊपर बिठा लिया। थोड़ी देर बाद आंधी कम हो गई। तो पत्ता भी तालाब के एक छोर पर पहुंच गया पत्ता जैसे ही छोर पर पहुंचा। तो चींटी अपने आप को किनारे पर पाकर बहुत खुश हुई।


और उसने पत्ते को बोली आज आपने मेरी जान बचाकर बहुत बड़ा उपकार किया है। सचमुच आप महान है। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। यह सुनकर पत्ता भावुक हो गया और बोला धन्यवाद तो मुझे आपको करनी चाहिए। 

क्योंकि आपके कारण ही आज पहली बार मेरा सामना मेरी काबिलियत से हुआ है। जिससे मैं आज तक अनजान था। आज पहली बार मैंने अपने जीवन के मकसद और अपनी ताकत को पहचान पाया हूं।

कहानी की सीख:-

दोस्तों,,, ईश्वर ने हम सभी को एक अनोखी शक्तियां दी है। कई बार हम अपने काबिलियत से अनजान होते हैं।और समय आने पर हमें अपनी काबिलियत का पता चलता है। हमें इस बात को समझना चाहिए। कि किसी भी एक काम में असफल होने का मतलब यह नहीं कि हम हमेशा के लिए अयोग्य और हार हुआ है। खुद की काबिलियत को पहचान कर आप वह काम कर सकते हैं। जो आज तक किसी ने नहीं किया है।

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