Hindi Moral Stories | राजा और कीमती हीरा प्रेरणा भरी कहानिया

हेलो दोस्तों,,, आज मैं आप लोगों के लिए नई नई Hindi Moral Stories और प्रेरणा भरी कहानियां लेकर आया हूं। इस कहानी को पढ़ने से आपको आपके जीवन में कभी भी असफल नहीं होने देगा। Hindi Moral Stories प्रेरणा भरी यह कहानी छोटी-छोटी है, लेकिन बहुत काम की है। क्योंकि छोटी-छोटी बातों में ही कई ऐसी चीज छुपी होती है। हिंदी कहानियां अच्छी अच्छी जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को सुधार सकता हैं। तो चलो आज की कहानी की शुरुआत करते हैं।

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 Hindi Moral Stories | राजा और कीमती हीरा प्रेरणा भरी कहानियां 

राजा और कीमती हीरा | Hindi Moral Stories | हिंदी कहानियां अच्छी अच्छी

बहुत समय पहले की बात है। एक बार एक राजा अपने दरबारी के साथ दरबार लगाया हुआ था। सर्दियों का मौसम था, इसलिए राजा ने यह दरबार अपने महल में न लगाकर खुले में लगाया था। पूरी आम सभा के लोग सुबह की धूप में बैठी थी। 

महाराज ने सिंहासन के सामने एक टेबल रखे हुए थे। कुछ जरूरी राजपाट को लेकर चर्चा हो रहे थे। पंडित लोग दीवान आदि सभी दरबार में बैठे हुए थे, जिससे दरबार काफी भरा हुआ था। राजा के परिवार के सदस्य भी एक तरफ बैठे हुए थे। 

इस समय एक व्यक्ति आया और प्रवेश मांगा प्रवेश मिल गया। तो उसने कहा मेरे पास दो वस्तुएं हैं। मैं हर राज्य के राजा के पास जाता हूं, और अपनी बात रखता हूं। कोई भी इस चीज को परख नहीं पता है, और सब हार जाते हैं। और मैं विजेता स्वरूप राजा से कुछ लेता हूं, और इस तरह में विजेता बनकर घूम रहा हूं। 

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अब मैं आपके दरबार में आया हूं, राजा ने बुलाया और कहा क्या बात है? उस वस्तु में और वह वस्तु क्या है? तो उसे व्यक्ति ने दोनों वस्तुएं निकालकर राजा के सामने टेबल पर रख दी। 

राजा और बाकी दरबारी ने उसे वस्तु को बड़े गौर से देखा। दिखने में दोनों बिल्कुल एक समान आकार के समान रूप, रंग और सामान प्रकाश का दिख रहा था। राजा ने कहा यह दोनों वस्तुएं तो एक ही है। 

तो उस व्यक्ति ने इस पर कहा कि हां दिखाई तो एक ही देती है। लेकिन यह दोनों अलग-अलग है। इनमें से एक चीज बहुत कीमती हीरा है, और एक कांच का टुकड़ा है। लेकिन रूप रंग सब एक है, जिसके कारण आज तक इसको कोई परख नहीं पाया है। की कौन सा हीरा है, और कौन सा कांच । 

अगर परख सही निकले तो मैं हार जाऊंगा। और यह कीमती हीरा में आपके राज्य के तिजोरी में जमा करवा दूंगा। यदि कोई इस चीज को ना पहचान पाए, तो इस हीरे की जो कीमत है? उतनी धनराशि आपको मुझे देनी होगी। इस प्रकार में कई राज्यों से जीता आया हूं। 

राजा ने कहा मैं तो नहीं परख सकूंगा। दीवान बोले हमें भी हिम्मत नहीं है कि इसको हम परख सकें। क्योंकि दोनों बिल्कुल एक समान दिखाई देते हैं। कोई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था, उसको परखने की, क्योंकि हारने पर पैसे देने पड़ेंगे। और इसका कोई सवाल नहीं क्योंकि राजा के पास बहुत धन है, राजा की प्रतिष्ठा गिर जाएगी। 

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इसका सभी दरबारी को भय था। कोई व्यक्ति पहचान नहीं पाया आखिरकार पीछे थोड़ी हलचल हुई। जिसमें एक अंधा आदमी हाथ में लाठी लेकर उठा उसने कहा मुझे महाराज के पास ले चलो मैंने सब बातें सुनी है। और यह भी सुना की कोई परख नहीं पा रहा है, एक अवसर मुझे भी दिया जाए। 

एक आदमी के सहारे वह राजा के पास पहुंच गया। उसने राजा से प्रार्थना कि मैं तो जन्म से अंधा हूं, फिर भी मुझे एक अवसर दिया जाए। जिससे मैं भी एक बार अपनी बुद्धि को परख हो सकता है, कि सफल भी हो जाऊं। और यदि सफल न भी हुआ, तो वैसे भी आप तो हार ही गए हैं, 

राजा को लगा कि इसे अवसर देने में क्या हर्ज है। राजा ने कहा ठीक है, तो उस आदमी को दोनों चीज छुआ दी गई। तो उसने पूछा इसमें कौन सा हीरा है और कौन सा कांच, यही परखना है। आदमी ने दोनों वस्तुओं को छुआ उस आदमी ने 1 मिनट में कह दिया कि यह हीरा है, और यह कांच। 

जो आदमी इतनी राज्यों को जीतकर आया था, वह नतमस्तक हो गया और बोला सही है। आपने पहचान लिया धन्य हो आप अपने वचन के मुताबिक यह हीरा में आपके राज्य की तिजोरी में दे रहा हूं। सब बहुत खुश हो गई है। और जो आदमी आया था। वह भी बहुत प्रसन्न हुआ कि कम से कम कोई तो मिला परखने वाला। 

वह राजा और और सभी लोगों ने उसे अंधे व्यक्ति से एक ही जगह ऐसा बताई कि तुमने यह कैसे पहचाने कि यह हीरा है और यह कांच उसे अंधे ने कहा कि सीधी सी बात है मालिक धूप में सब बैठे हैं। मैंने दोनों कुछ हुआ जो ठंडा रहा वह हीरा और जो कम हो गया वह कांच था। क्योंकि कितनी भी गर्मी हो हीरे कभी गम नहीं होते।

कहानी की सीख :-

इस कहानी से हमें यह सीख सीखने को मिलती है। कि किसी भी व्यक्ति की शारीरिक अपांता को देखकर उसकी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए और उसको भी बराबर मौका देनी चाहिए क्या पता उसके पास उसे समस्या का हाल होगा जिसकी आप तलाश कर रहे हैं।

जीवन से मत भागो जियो उद्देश्य के लिए | Hindi Moral Stories | हिंदी कहानियां अच्छी अच्छी

यह घटना बहुत दिन पहले की है और एक वास्तविक घटना है। जब इंग्लैंड में डॉक्टर एनी बेसेंट अपने वर्तमान जीवन की प्रति निरस्त थी। और एक सार्थक जीवन जीने की ललक उनके हृदय में तीव्रता से जाग उठे थे। 

एक दिन अंधेरी रात्रि में सभी परिवारजन गहरी नींद में सोए हुए थे। तब केवल डॉक्टर एनी पेशेंट जाग रही थी, और आत्मा की शांति के लिए इतनी बेचैन थी। की जीवन से भाग जाने का ख्याल उसके मन में आने लगा, सामने रखी जहर की शीशी लेने के लिए वह चुपके से उठी। 

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लेकिन तभी किसी दिव्या शक्ति की आवाज ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। क्यों जीवन से डर गई, सत्य की खोज कर यह सुनकर वह चौंक गई। अरे यह आवाज किसकी है, कौन मुझे भागने से रोक रहा है। 

उन्होंने यह सुनकर निश्चय कर लिया। सार्थक जीवन जीने के लिए मुझे संघर्ष करना ही होगा। सत्य की खोज के लिए भी अपना परिवार सुख संपत्ति आदि सब कुछ छोड़कर भारत आ गई। 

उन्होंने साध्वी जैसा सादा जीवन यहां ग्रहण किया। और विश्व को भारतीय जीवन दर्शन के रंग में रंग देना ही इसका प्रमुख उद्देश्य बन गया। उनकी मृत्यु भारत में हुई थी।

कहानी की सीख :-

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख सीखने को मिलती है, कि मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। जिसके दौरान वह अपने शुद्ध चेतना से समर्पण भाव को जागृत कर के जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति कर लेता है।

विनम्रता बनाए रखें जीवन में | Hindi Moral Stories | हिंदी कहानियां अच्छी अच्छी

एक चीनी संत थे। जो बहुत बुढे हो गए थे, उसका मरने का समय निकट आया। तो उनकी सभी शिष्य उपदेश सुनने और अंतिम प्रणाम करने के लिए उस संत के पास एकत्रित हुए। 

उस संत ने उपदेश न देकर उन्होंने अपना मुंह खोला और 
अपने शिष्यों से पूछा- देखो इसमें दांत है क्या? 

तो शिष्यों ने उत्तर दिया- एक भी नहीं। 

दूसरी बार फिर उन्होंने मुंह खोला- और पूछा देखो इसमें जीभ है क्या? 

सभी शिष्यों ने एक स्वर में उत्तर दिया- हां है। 

संत ने फिर पूछा अच्छा एक बात बताओ- जीभ जन्म से थी, या दांत। 

तो शिष्यो ने जवाब दिया- जीभ। 

यह शुनकर संत ने अपने शिष्यो को समझाया। कि जीभ जन्म से थी, और मृत्यु तक रहेगी। जबकि दांत पीछे उगे और पहले चले गए। इसका क्या कारण है?

इस प्रश्न का उत्तर किसी भी शिष्य ने नही दें पाया। तो संत ने कहा- जीभ कोमल होती है, इसलिए टिकी रही। और दांत कठोर थे इसलिए उखड़ गए।

कहानी की सीख 

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है। कि हमें अपने जीवन में विनम्रता बनाए रखनी चाहिए। क्योंकि विनम्रता ही अधिक देर तक चलती है।

सत्य का साथ कभी ना छोड़े | Hindi Moral Stories | हिंदी कहानियां अच्छी अच्छी

यह कहानी स्वामी विवेकानंद की है। स्वामी विवेकानंद प्रारंभ से ही एक मेधावी छात्र थे। और सभी लोग उनके व्यक्तित्व और वाणी से प्रभावित रहते थे। 

जब वह अपने साथी छात्रों से कुछ बाते करते तो सब दोस्त मंत्र मुक्त होकर उनकी बातों को सुनते थे। एक दिन कक्षा में वह कुछ मित्रों को कहानी सुना रहे थे। 

सभी उनकी बातें सुनने में इतने मग्न थे। कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब मास्टर जी कक्षा में आए और पढाना शुरू कर दिया। 
मास्टर जी ने अभी पढ़ना शुरू किया ही था, कि उन्हें कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी। कौन बात कर रहा है? मास्टर जी ने तेज आवाज में पूछा- सभी छात्रों ने स्वामी विवेकानंद के साथ बैठे छात्रों की तरफ इशारा कर दिया। 

मास्टर जी काफी क्रोधित हो गए। उन्होंने तुरंत उन छात्रों को बुलाया और पाठ से संबंधित प्रश्न पूछने लगे। 

जब कोई भी उत्तर नहीं दे पाया। तब अंत में मास्टर जी ने स्वामी जी से भी वही प्रश्न क्या। स्वामी जी तो मानो सब कुछ पहले से ही जानते हो उन्होंने आसानी से उस प्रश्न का उत्तर दे दिया।

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यह देख मास्टर जी को यकीन हो गया, कि स्वामी जी पाठ पर ध्यान दे रहे थे। और बाकी छात्र बातचीत में लगे हुए थे। 

फिर क्या था, उन्होंने स्वामी जी को छोड़कर सभी दोस्तों को बेंच पर खड़े होने की सजा दे दी। सभी छात्र एक-एक कर बेंच पर खड़े होने लगे। स्वामी जी ने भी यही किया मास्टर जी बोले नरेंद्र तुम बैठ जाओ।

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तो स्वामी जी ने कहा नहीं सर मुझे भी खड़ा होना होगा। क्योंकि वह मैं ही था, जो इन छात्रों से बात कर रहा था। स्वामी जी की सच बोलने की हिम्मत देख सभी छात्र बहुत प्रभावित हुए।

कहानी की सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कभी भी हमें झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। और हमेशा सच बोलने चाहिए। चाहे स्थिति कैसी भी हो।


तो दोस्तों उम्मीद करता हूं, आप सभी लोगों को Hindi Moral Stories हिंदी कहानियां अच्छी अच्छी बहुत अच्छी लगी होगी। अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी है, तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। साथ ही आपको यह कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में कमेंट जरुर करें। ऐसे ही रोचक और प्रेरणा भरी कहानी पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Hindistories.World में जरूर आए।

Hindi Moral Stories FAQ :-

Hindi Moral Stories क्यों पढ़नी चाहिए?

Hindi Moral Stories बच्चो के चारित्रिक विकास होता है।

Hindi Moral Stories क्या होता है ?

मोरल कहानी एक प्रेरणादायक कहानी होती है। जिससे पड़ने के बाद हमें प्रेरणा मिलती है।

Hindi Moral Stories किसको पढ़नी चाहिए ?

प्रेरणादायक कहानी सभी को पढ़नी चाहिए। जिसके कारण मन सकारात्मक की और जाती है। जिससे मन प्रसन रहता है।

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