Top 10 Moral Stories In Hindi | हिंदी मैं नैतिक कहानियाँ

हेलो दोस्तों,,, आज मैं लेकर आया हूँ, आप लोगो के लिए Top 10 Moral Stories In Hindi एक मजेदार कहानियो का संग्रह, जिसे पड़ने के बाद आप सभी को बहुत मजा आएगा। साथ ही नई सिख भी आपको सिखने को मिलेंगी। और बच्चो को अच्छी काम करने के लिए प्रेरित भी करेंगी। बच्चो को डाटने या मरने से नहीं समझाया जा सकता है। आप उसको जितना प्यार से और सरल भाषा मैं समझायेंगे। उतना ही जल्दी बच्चा सीखेंगे और समझेंगे भी।

इसलिए बच्चो को सरल भाषा और मजेदार तरीके से समझने के लिए हम यह कहानी लेकर आया है। जिससे की बच्चा बोरिंग भी न हो। और सरलता से समझे। तो चलो बिना देरी किये कहानी की शुरुआत करते है।
Top 10 Moral Stories In Hindi
Top 10 Moral Stories In Hindi

Top 10 Moral Stories In Hindi छोटे बच्चो की हिंदी कहानियाँ

व्यक्ति की महानता | Top 10 Moral Stories In Hindi

व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं, पहनावे पर नहीं। एक बार की बात है। किसी गाँव में एक पंडित रहता था| वैसे तो पंडित जी को वेदों और शास्त्रों का बहुत ज्ञान था। लेकिन वह बहुत ग़रीब थे। ना ही उसके रहने के लिए अच्छा घर था, और ना ही अच्छे भोजन के लिए पैसे।

एक छोटी सी झोपड़ी थी, उसी में रहते थे। और भिक्षा मांगने के बाद जो उसे मिलता था। उसी से अपना जीवन यापन करते थे। एक बार वह पास के किसी गाँव में भिक्षा माँगने गये, उस समय उनके कपड़े बहुत गंदे थे। और काफ़ी जगह से फट भी गये थे।

जब उन्होने गांव के एक घर का दरवाजा खटखटाया, तो सामने से एक व्यक्ति बाहर आया, उसने जब पंडित को फटे चिथड़े कपड़ों में देखा तो उसका मन घृणा से भर गया। और उसने पंडित को धक्के मारकर घर से निकाल दिया,
बोला- पता नहीं कहाँ कहाँ से गंदा पागल चला आया है।
पंडित दुखी मन से वापस चला आया। जब वह अपने घर वापस लौट रहा था।

तो किसी अमीर आदमी की नज़र पंडित के फटे कपड़ों पर पड़ी। तो उसने दया दिखाई और पंडित को पहनने के लिए नये कपड़े दे दिए। अगले दिन पंडित फिर से उसी गाँव में उसी व्यक्ति के पास भिक्षा माँगने गया।

व्यक्ति ने नये कपड़ों में पंडित को देखा और हाथ जोड़कर पंडित को अंदर बुलाया और बड़े आदर के साथ थाली में बहुत सारे व्यंजन खाने को दिए। पंडित जी ने एक भी टुकड़ा अपने मुँह में नहीं डाला और सारा खाना धीरे धीरे अपने कपड़ों पर डालने लगे और बोले- ले खा और खा।

वह व्यक्ति, ये सब बड़े आश्चर्य से देख रहा था।
आख़िर उसने पूछ ही लिया कि- पंडित जी आप यह क्या कर रहे हैं, सारा खाना अपने कपड़ों पर क्यूँ डाल रहे हैं।

पंडित जी ने बहुत शानदार उत्तर दिया- क्यूंकी तुमने ये खाना मुझे नहीं, बल्कि इन कपड़ों को दिया है। इसीलिए मैं ये खाना इन कपड़ों को ही खिला रहा हूँ।

कल जब में गंदे कपड़ों में तुम्हारे घर आया था। तो तुमने धक्के मारकर मुझे घर से बाहर निकाल दिया। और आज तुमने मुझे साफ और नये कपड़ों में देखकर अच्छा खाना परोस दिया। असल में तुमने ये खाना मुझे नहीं, इन कपड़ों को ही दिया है।

इसलिए मैं इसे खिला रहा हूँ। वह व्यक्ति यह सुनकर बहुत दुखी हुआ। अब आगे वह कर भी क्या सकता था। इसलिए वह इस बात का बहुत आत्मग्लानि महसूस हुई। और अपमानित भी।

कहानी की सीख

इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है। कि किसी व्यक्ति की महानता उसके चरित्र और ज्ञान पर निर्भर करती हैं। न की उसके पहनावे पर। इंसान अच्छे कपड़े और कीमती गहने पहनने से महान नहीं बनता। इंसान को महान बनता है उसके अच्छे कर्म, चरित्र, और ज्ञान।इसलिए हमे इंसानो के पोशाक से नही आंकना चाहिए।

सकारात्मक सोच का असर | Top 10 Moral Stories In Hindi

एक बार की बात है। दो मित्र थे, वे किसी जूते बनाने की कंपनी मे काम करते थे। कंपनी में जूते बनते थे, और उन दोनों का काम था, मार्केट में जूते बेचना। जिससे जूते के करोबार क्षेत्र मैं वृद्धि हो। और जूते की बिक्री बड़े।

यह सोचकर एक बार कंपनी के मालिक ने उनको किसी ऐसे गाँव मे जूते बेचने भेजा। जहाँ सभी लोग नंगे पैर रहते थे, कोई चप्पल या जूते नहीं पहनता था।और वो लोग चप्पल जूते के बारे मैं जानते ही नही थे।

पहला मित्र गाँव में जाता है। और वहाँ के लोगों को देखकर बड़ा परेशान हो जाता है, कि यहाँ तो कोई जूते ही नहीं पहनता, यहाँ में अपने जूते कैसे बेचुँगा। ये सोचकर वो वापस आ जाता है। और अपने मित्र को बोलता है। वहाँ की लोग चप्पल जूते नही पहनते है। इसलिए वहाँ के लोगो को इसकी जरूरत नही है।

यह सुनकर दूसरा मित्र अवक् हो जाता है। और मन ही मन खुश भी होता है।फिर दूसरा मित्र गाँव में जाता है, और अपने मित्र के बातो को आँखों के सामने देखकर काफ़ी खुश होता है, कि यहाँ तो कोई जूते ही नहीं पहनता।

अब तो मैं अपने सारे जूते, यहाँ बेच सकता हूँ। यहाँ तो मेरे बहुत सारे ग्राहक हैं। और अपने जूते का करोबार कुछ ही दिनों मैं बड़ा लेता है। और जुता बेचकर बहुत सारी मुनाफा कमा लेता है।

कहानी की सीख

तो दोस्तो इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है की हमे सकरात्मक सोच को ही आगे बड़ाना है।दुनिया मे कुछ भी असंभव नहीं है, बस सोच हमेशा सकारात्मक होनी चाहिए। सकारात्मक सोच रखने वाले लोग चाँद पर भी पहुँच जाते हैं।

गधा और भेड़िया की कहानी | Top 10 Moral Stories In Hindi

किसी घने जंगल में एक गधा रहता था। एक दिन गधा घने जंगल मैं घास चरते चरते घने जंगल मैं काफी दूर निकल गया था। वहाँ पर सन्नाटा लग रहा था। तभी अचानक वहां एक भेड़िया वहाँ आता है।

वह अकेले गधेे को देखकर, वो भेड़िया सोचता है, कि क्यों ना आज इस गधे का शिकार किया जाये। काफी तंदरुस्त गधा है, और ज्यादा मांस भी होगा तो दो तीन दिन का काम हो जायेगा। यही सोचकर वो गधे के पास जाता है। और बोलता है – अरे गधे तेरे दिन अब ख़त्म हुए मैं तुम्हें खाने जा रहा हूँ।

अचानक गधा हक्का बक्का रह जाता है। और इधर उधर किसी को ना देखकर बुरी तरह घबरा जाता है। फिर भी वह साहस नहीं छोड़ता।
फिर कुछ सोचकर भेड़िये से बोलता है- आपका स्वागत है श्रीमान! मुझे कल साक्षात भगवान ने सपने में आकर कहा था। कि कोई बड़ा दयालु और बुद्धिमान जानवर आकर मेरा शिकार करेगा। और मुझे इस दुनिया के बंधन से मुक्त करायेगा।

मुझे लगता है, कि आप ही वो दयालु और बुद्धिमान जानवर हैं। भेड़िया मन ही मन सोचता है, कि अरे वाह! ये तो खुद ही मेरा शिकार बनने को तैयार है। ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी, इसको मारने में।
गधा फिर बोलता है- लेकिन महाराज, मेरी एक आखिरी इच्छा है। मैं चाहता हूँ, कि आप मुझे खाने से पहले मेरी आखिरी इच्छा जरूर पूरी करें।

भेड़िया बोला- हाँ हाँ, क्यों नहीं। कहो क्या है तुम्हारी आखिरी इच्छा?
गधा विनम्रता से बोला- महाराज मेरे पैर में एक छोटा पत्थर फंस गया है, क्या आप उसे निकल देंगे?
भेड़िया खुश होकर बोला- वाह इतना सा काम अभी करता हूँ, कहाँ है पत्थर ?

फिर भेड़िया गधे के पीछे जाकर जैसे ही उसके पैर के पास गया, गधे ने भेड़िये के चेहरे पे इतनी जोर से लात मारी, कि भेड़िया तिलमिला कर बहुत दूर जाकर गिरा। फिर उसके बाद गधा पूरी ताकत के साथ वहां से भाग निकला, भेड़िया देखता रह गया।

कहानी की सीख

दोस्तो,, इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है, की कभी भी हमे मुश्किल वक्त मैं घबराना नही चाहिए। और पूरी दृड्ता के साथ निर्णय लेनी चाहिए।

खुद को रोकने वाले | Top 10 Moral Stories In Hindi

  • खुद तलाशें अपने रास्ते…
कई बार तमाम क्षमताओं के मौजद होने के बावजूद हम अच्छे से कुछ कर नहीं कर पाते हैं। हमारे अंदर बैठा एक भय हमें आगे बढकर रिस्क लेने से रोकता हैं। कभी यह डर विफलता का होता हैं। तो कभी कुछ गवां बैठने का। इन डरों से जीत पाने के लिए बस थोड़ी हिम्मत जुटाकर, थोडा लोजिकल होकर सोचना हैं। और खुद मैं यकीन दिखाना हैं।
  • सही रास्ता पहचाने
सफल होने के लिए सही रस्ते तक पहुँचना जरुरी हैं। और सही रस्ते तक पहुँचने के लिए आपको कई कठिन रास्तों को भी परखना पड़ सकता हैं। यदि विफलता के डर से आप सामने मौजूद विकल्प को अपनाने में झिझकते रहेंगे। तो अपने मंजिल तक पहुँचने का सही रास्ता नहीं चुन पाएंगे।
  • कुछ अलग करें
एक ही तरह का काम कर – करके लोग उनमे निपुण हो तो जाते हैं। लेकिन अक्सर वे एक कम्फर्ट जोन के गुलाम भी हो जाते हैं। इसका दुष्प्रभाव यह होता हैं, कि वे किसी भी नए काम में हाथ आजमाने से बचने लगते हैं। अपने कंफर्ट जोन के परे जाकर एक्सपेरिमेंट करें और क्षमाताओं को विस्तार दे।
  • पहचाने अवसर को
अपनी मर्जी का काम करने का अवसर आपको अपने करियर में कभी भी मिल सकता हैं। लोग सब कुछ जमा-जमाया गंवाने के डर से इसे अपनाते नहीं। अपनी पसंद का अवसर मिलने पर उसे अपनाने से चूंके नहीं। इस अवसर को तभी पहचान पाएगे, जब उस दिशा में लगातार मेहनत कर रहे होंगे।

कहानी की सीख

दोस्तो उपर जो बताया गया है। यह बिल्कुल सही बात है, की लोग अपनी मंजिल तक नही पहुँच पाते है। अगर आप भी मंजिल तक पहुंचना चाहते है, तो बताये गए बातो को फॉलो जरूर करें।

तो दोस्तो उम्मीद करता हूँ आप सभी को यह Top 10 Moral Stories In Hindi कहानी बहुत अच्छी लगी होगी। और कुछ नया सीखने को मिला होगा। कहानी आपको पसंद आई हो तो अपने दोस्तो के साथ शेयर जरूर करें। साथ ही कहानी आपको कैसे लाई कॉमेंट मैं जरूर बताये। ऐसी ही नई नई कहानियाँ पड़ने के लिए हमारी वेबसाइट Hindistories.World पर जरूर आए।

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