Very Short Moral Stories In Hindi | चार दोस्तों की कहानी

हेलो दोस्तों,,, आज मैं लेकर आया हूँ, आपलोगो के लिए एक बहुत ही मजेदार Very Short Moral Stories In Hindi कहानी जो चार दोस्तों की कहानी है। इसमें आपको एक नया मोटिवेशन सिखने को मिलेगा। एक गरीब दोस्त को घर से निकालने के बाद, कैसे चारो दोस्त अपने अपने घर छोड़ के दूसरे राज्य मैं राजा और मंत्री बन जाते हैं।
Very Short Moral Stories In Hindi


Very Short Moral Stories In Hindi | चार दोस्तों की कहानी,जो घर छोड़ने के बाद राजा बने।

एक गांव में चार मित्र रहते थे। उनमें एक राजकुमार का, दूसरा मंत्री का, पुत्र तीसरा सेठ का लड़का, और चौथा किसान का बेटा। एक दिन किसान ने अपने पुत्र से कहा- सुनो बेटा, तुम्हारे तीनों दोस्त धनवान है। महज तुम उनमें गरीब हो। भला अमीर और गरीब का क्या मेल, तुम उनके साथ छोड़ दो।

बेटा बोला - नहीं पिताजी, मैं उनके साथ नहीं छोड़ सकता। यह सुनकर पिता आग बबूला हो गए। और उन्होंने लड़के को घर के बाहर दरवाजा दिखा दिया। किसान के किसान बेटे ने अपने मित्रों को सारी बात बताई। सब ने तय किया, कि वह भी अपना-अपना घर छोड़ देंगे।

इसके बाद सब ने अपने घर और गांव से विदा ली। और जंगल की ओर चल पड़ी। जंगल में उन्हें खाने को कुछ भी नहीं मिला। रात को तीनों दोस्त एक पेड़ के नीचे भूखे सो गए। किसान का लड़का रात भर जागता रहा। उसने भगवान से प्रार्थना की। है,, प्रभु अगर तुम सचमुच कहीं हो, तो हमारी सहायता करो।

उसकी यह पुकार सुनकर, भगवान एक बूढ़े आदमी के रूप में वहां प्रकट हुए।
और लड़के से कहा- मांग लो, जो कुछ मांगना है।
लड़के ने कहा- मेरे मित्र भूखे हैं, उन्हें कुछ खाने को दे दो।
बूढ़े ने कहा- सामने आम का पेड़ है, उस पेड़ पर चार आम लगे हैं। एक पूरा पका हुआ, दूसरा उससे कुछ कम पक्का हुआ, तीसरा अध्पका और चौथा एकदम कच्चा।

यह चारों आम तुम लोग खाओ, तुम में से जो पहला आम खाएगा। वह राजा बन जाएगा, दूसरा आम खाने वाला राजा का मंत्री बन जाएगा, जो तीसरा आम खाएगा, उसके मुंह से हीरे निकलेंगे। तथा चौथा आम खाने वाले को उम्र कैद की सजा भोगनी होगी। ऐसा कहकर बूढ़ा आदमी चला गया, 

किसान का बेटा चारों आम ले आया। सुबह उसने कच्चा आम अपने लिए रख लिया। और बाकी आम सबको खाने के लिए दे दिए। सबने आम खा लिए, फिर सब वहां से आगे पड़ाव दर पड़ाव चल पड़े। चलते-चलते रास्ते में सबको प्यास लगी। उन्हें एक कुआं दिखाई दिया।

वह सब पानी पीने लगे, राजकुमार ने पानी पिया और कुला किया। तो उसके मुंह से हीरे निकल आए। उसे हीरे की परख थी, चुपचाप फिर अपने जेब में रख लिए। दूसरे दिन सुबह एक नगर में पहुंचने के बाद उसने एक हीरा निकालकर मंत्री पुत्र को दिया। और खाने के लिए कुछ लाने को कहा- वह हीरा लेकर बाजार जा पहुंचा,

उसने देखा गाजे बाजे के साथ, एक हाथी आ रहा है, पीछे जनता का हुजूम आ रहा है। मंत्री पुत्र ने एक आदमी से पूछा- क्यों भाई, यह कैसा तमाशा है,
एक नागरिक ने कहा- नगर के राजा बिना संतान के संसार से विदा हो गए। राज्य के लिए राजा चाहिए। यह हाथी जिस किसी के गले में माला डालेगा। वही हमारा राजा बनेगा।

बात चल ही रही थी, कि हाथी ने मंत्री पुत्र के पास आकर अचानक गले में माला डाल दी। अब मंत्री पुत्र राजा बन गया। वह राजवैभव में मत-मस्त होकर सभी अपने-परायो को भूल गया। बहुत समय बीतने पर भी मंत्री पुत्र नहीं लौटा। तो राजकुमार ने सेठ के पुत्र को कुछ सामान लाने को कहा- वह सामान लेने बाजार की ओर गया।

राज्य में मंत्री भी नहीं था, इसलिए हाथी को माला देकर दोबारा भेज गया। इस बार हाथी ने एक दुकान के पास खड़े सेठ के बेटे को माला पहनाई। वह भी मंत्री बन गया। और अपने दोस्तों को भूल गया। इधर राजकुमार और किसान का लड़का, मारे भूख के बेहाल से किसान के बेटे ने कहा- अब मैं खाने को कोई चीज ले आता हूं। वह एक दुकान पर गया खाने की चीज लेकर जेब से हीरा निकाल कर, उसने दुकानदार को दिया।

फटेहाल के पास बेस कीमती हीरा देखकर दुकानदार ने सोचा- यह चोर है, उसने तुरंत राजा की सिपाहियों को बुलाया। सिपाहियों ने उसे गिरफ्तार कर जेल में भिजवा दिया। उधर राजकुमार मारे चिंता के परेशान था। हारकर अपने दोस्तों को खोजने निकला। रास्ते में उसे सोने की एक रस्सी पड़ी दिखाई दी। जैसे ही उसने रस्सी उठाई वह सुनहरे रंग की तोता बन गई।

तभी आकाशवाणी होती है, एक राजकुमारी ने प्रण किया है, कि वह सुनहरे तोते के साथ ही ब्याह करेगी। तोता आसमान में उड़ता हुआ, इस राजमहल में जा पहुंचा। जहां राजकुमारी दिन रात सुनहरे तोते की राह देख रही थी। राजा ने सुनहरे तोते के साथ राजकुमारी का विवाह कर दिया। 

बियाह होते ही तोता सुंदर राजकुमार बन गया। राजा ने अपने आधा राज पाठ उसे दे दिया। अब राजकुमार को अपने मित्रों की याद आई। उसने पड़ोसी राज्य पर हमला करने की घोषणा की। बिना किसी कारण के युद्ध की घोषणा सुन पड़ोसी राजा को आश्चर्य हुआ।

राजा ने अपने सलाहकारों से राय मस्वीरा किया। लड़ाई शुरू होने से पहले ही उस राज्य का राजा और मंत्री, राजकुमार से मिलने आए। राजा और मंत्री को राजकुमार ने पहचान लिया। अब तीनों ने मिलकर किसान के पुत्र को खोजना शुरू किया।

जब सब कैदियों को रिहा किया गया। तो उसमें किसान का लड़का भी कैद से रिहा हो गये। और सबने अपने दोस्त को पहचान लिया। उसके बाद सबने अपनी-अपनी संपत्ति के चार बराबर हिस्से किया। और सभी दोस्त सुख चैन से रहने लगे।

Hindi Moral Stories | कहानी का पात्र

एक राजकुमार का बेटा-पडोसी राज्य का राजा। 
दूसरा मंत्री का बेटा-राजा बन जाता है। 
पुत्र तीसरा सेठ का लड़का- मंत्री बन जाता है। 
चौथा किसान का बेटा- चोर बन जाता है। 

कहानी की सीख :-

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती हैं ,की हम दोस्तों के साथ किसी भी बात को छुपानी नहीं चाहिए। और पूरी बफादारी के साथ दोस्ती निभानी चाहिए। सुख हो या दुःख हो हमें अपने दोस्तों को नहीं भूलना नहीं चाहिए। 

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