Moral Stories For Kids In Hindi | बच्चो के लिए प्रेरणा भरी

हेलो दोस्तों,,, आज मैं आपलोगो के लिए लेकर आया हूँ ,एक बहुत ही मजेदार कहानी जो कि Moral Stories For Kids In Hindi एक नैतिक कहानी है। नैतिक कहानियां बच्चो के साथ बड़े लोगो के लिए भी बहुत ही अच्छी होता है। नैतिक कहानियां बच्चो को पड़ने से उनमे अच्छी सोच के साथ साथ चारित्रिक विकाश भी होता है। और बच्चो मैं प्रेरणा भी आती हैं।

Moral Stories For Kids In Hindi

Moral Stories For Kids In Hindi | सेवा के बदले

बहुत समय पहले की बात है, अफ्रीका के दक्षिण भाग में बस एक छोटा सा देश है। जिसका नाम वस्तु लैंड है। वस्तु लैंड का अधिकांश हिस्सा घने जंगल से घिरा हुआ है। इन्हीं जंगलों के बीच कावु गांव में विशाल नाम का एक नौजवान लड़का रहता था।

वह रोज जंगल में जाता, और शिकार करता। इसी से घर का गुजारा चलता। हमेशा की तरह एक दिन वह जंगल में शिकार करने गया, और शिकार ढूंढते ढूंढते वह काफी दूर निकल गया।

इस बीच दोपहर हो गई, तब तक विशाल थक गया था। भूख प्यास के मारे बेहाल होकर वह जंगल के भीतर बढ़ता,चला गया।

चलते-चलते वह सासे नामक शहर में पहुंच गया। जहां उसे एक हवेली दिखाई दी। वह हवेली किसी गौरे साहब की थी। विशाल, फाटक खोलकर अंदर गया और दरवाजा खटखटाया।

आवाज सुनकर गौरे साहब बाहर निकले। विशाल को गांव की वेशभूषा वाले काले नौजवान को देखकर, उन्होंने गुस्से से पूछा- क्या बात है?

विशाल उनका गुस्सा देखकर सहम गया। फिर साहस करके बोला- साहब,,, प्यास से मेरा दम निकल जा रहा है। कृपया पानी पिलाने का कष्ट करें?

पर गौरे साहब को दया नहीं आई?

उन्होंने विशाल को अपमानित करके बाहर निकाल दिया। विशाल किसी तरह अपने घर वापस पहुंचा।

कई महीने बीत गए एक दिन वहीं गौर साहब जंगल में शिकार खेलने के लिए गए हुए थे। उन्हें कोई शिकार नहीं मिला, जंगल में भटकते भटकते वह विशाल के गांव तक पहुंच गया।

रात भी होने वाली थी, वह एक झोपड़ी के सामने पहुंचा, वह झोपड़ी विशाल की थी। गौर साहब ने आवाज लगायी, तो उसे झोपड़ी से विशाल निकला।

जैसे ही उसकी नजर गौरे साहब पर पड़ी वह तुरंत उन्हें पहचान गया। पर गौरे साहब ने विशाल को नहीं पहचान पाए। उन्होंने विशाल से रात भर के लिए अपनी झोपड़ी में रहने के लिए जगह मांगा।

विशाल तुरंत तैयार हो गया उसके पास जो भी रुखा सुखा खाना था। उसी से उसने गौरे साहब की सेवा के गौरे साहब को सोने के लिए अपना बिस्तर दे दिया। और खुद जमीन पर सो गया।

सुबह हुई, तो गौरे साहब ने विशाल को ''धन्यवाद'' दिया। और शहर तक जाने का रास्ता पूछा- विशाल ने कहा- चलिए मैं आपको छोड़ देता हूं।

साहब को हवेली के पास पहुंचा कर विशाल ने वापस जाने की इजाजत मांगी, पर गौर साहब ने कहा- यह कैसे हो सकता है। तुमने मेरा इतना आदर सत्कार किया अब मुझे भी अपने लिए कुछ करने दो, चलो चल कर मेरे साथ नाश्ता करो।


गौरे साहब की बात सुनकर विशाल मन ही मन मुस्कुराया, और बोला- साहब आप मेरी सेवा के बदले में मेरा सत्कार करना चाहते हैं। यह ठीक नहीं है, क्या मतलब है तुम्हारा।

गौरे साहब ने पूछा- तब विशाल ने अपने पुरानी कहानी गौरे साहब को याद दिलाई और कहा जरूरतमंद व्यक्ति की मदद हमेशा करनी चाहिए।

आखिर सभी को एक दूसरे की जरूरत पड़ती है। इतना कह कर विशाल अपने गांव की ओर चल दिया। गौरे साहब का सर शर्म के मारे झुक गया था।

कहानी की सीख :-

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है, कि हमें कभी भी किसी को दुत्कारना नहीं चाहिए। और जरूरतमंद व्यक्ति को मदद करनी चाहिए। क्या पता आज आप उसकी जरूरत है, तो हो सकता है कल वह आपकी जरूरत हो सकती है।

हंस और पेड़ की दोस्ती | Moral Stories For Kids In Hindi

यह कहानी राजस्थान की लोक कथा है। और राजस्थान में काफी लोकप्रिय कहानी है, राजस्थान के लोग बड़े ही शान से इस कहानी को सुनते हैं। और अपने बच्चों को भी सुनाते हैं, ताकि बच्चे भी इससे प्रेरित होकर अपने जीवन में अच्छे काम करें। और दोस्ती का सही मतलब समझे और दोस्ती निभाए। तो चलो बिना देरी के इस कहानी की शुरुआत करते हैं।

Moral Stories For Kids In Hindi


एक जंगल में फलों फूलों और पत्तों से समृद्ध बहुत ही शीतल छायादार और विशाल वृक्ष था। वह पशुओं के लिए बहुत ही मनपसंद वृक्ष था।

क्योंकि सारे पक्षी उस जंगल के इसी विशाल वृक्ष पर अपना घोषला बनाकर निवास करते थे।

एक दिन बहुत तेज हवा चल रही थी। जिससे बांस से आपस में रगड़ खाने लगी और वृक्ष में आग लग गई।

उस हरे भरे वृक्ष के जलते देखकर वह सारे पक्षी जो उस विशाल वृक्ष में अपना घोंसला बनाकर रहते थे। वह सारे पक्षी उस वृक्ष को जलते छोड़कर अन्य वृक्षों की खोज में निकल पड़े।

इस वृक्ष पर दो हंस रहते थे, वह दोनों हंस आग लग जाने पर पंख होते हुए भी उड़े नहीं। आग की लपेटो में झुलस्ते वृक्ष ने डाल में बैठे दोनों हंसों से कहा-

''आग लगी वन खंड में, दाझे चंदन वंश''
''म्हे तो दँझा पंख, क्यों दाझे हंस''

यानी आग लग जाने पर तुम दोनों क्यों नहीं उड़ रहे हो। मेरे तो पंख नहीं होने के कारन उड़ नहीं पा रहे हैं। पर तुम्हारी क्या मजबूरी है, तुम्हारे पास तो पंख है। तुमलोग उड़ के जा सकते हैं।

इस पर हंस ने उत्तर दिया-

''पान मैरोढ़या, फल सख्या, बैठ्या एकण डाल''
''तू दाझे में उड़ चले, जीणो कितेक काल''

यानी हमने तुम्हारे डाल मरोडे, फल खाए, एक डाल पर साथ-साथ बैठे। आज जब आप जल रहे हैं। तो हे वृक्ष महाराज हम तुम्हें छोड़कर क्यों जाएं।

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आखिर हमें भी कितना सा जीना है। दोनों हंसों के मुंह से यह बात सुनकर वृक्ष महाराज काफी खुश हुए और नाराज भी हुए कि वह अपने साथ इन दो प्यार हंसो को आग की धांश झेलना पड़ रहा है। और आग की लपेटो मैं सारी चीज उजड़ गयी।

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कहानी की सीख :-

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है,की जिस तरह किसी की ख़ुशी के पल मैं साथ तो रहते है। लेकिन हमें बिलकुल इसी तरह दुःख की घडी मैं साथ रहनी चाहिए। इन दोनों हंसो की तरह।

तो दोस्तों उम्मीद करता हूँ, आप लोगो को यह कहानी अच्छी लगी होंगी। अगर अच्छी लगी है तो अपने प्यारे दोस्तों के साथ शेयर जरुर करें । साथ ही ऐसे ही कहने पड़ने के लिए हमारे वेबसाइट Hindistories.World पर जरूर आए।

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